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आज 'ये ज़मीं चुप है.. आसमां चुप है'

Medhaj News 20 Aug 19 , 06:01:39 Business & Economy
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संगीतकार खय्याम बॉलीवुड के ऐसे संगीतकार थे, जिन्होंने कम फिल्मों में संगीत दिया, मगर उनके गीत और धुनें अमर हैं। उनके गीत रोजाना आकाशवाणी अथवा टेलीविजन पर किसी न किसी रूप में सुनाए-दिखाए जाते हैं। अपने 6 दशक के बॉलीवुड सफर में शानदार राज करने वाले खय्याम साहब 19 अगस्त 2019 को 92 बरस की उम्र में नहीं रहे। खय्याम का पूरा नाम है मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी। 18 फरवरी 1927 को उनका जन्म पंजाब के जालंधर जिले के नवाब शहर में हुआ था। पूरा परिवार शिक्षित-दीक्षित था। 4 भाई और 1 बहन। सबसे बड़े भाई अमीन परिवार का ट्रांसपोर्ट बिजनेस देखते थे। दूसरे भाई मुश्ताक जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए। तीसरे भाई गुलजार हाशमी शायरी करते थे, लेकिन छोटी उम्र में इंतकाल हो गया। खय्याम अपने पिता के चौथे बेटे थे, जो संगीत के शौक के कारण पांचवीं तक पढ़ाई कर घर से भाग आए थे। संगीत तथा एक्टिंग के शौक के चलते परिवार वाले इतना नाराज थे कि उन्हें घर से भागना पड़ा। सिर्फ खय्याम के मामाजी को गीत-संगीत से लगाव था। उन्होंने ही मुंबई (पहले बम्बई) में खय्याम को बाबा चिश्ती से मिलवाया, जो बीआर चोपड़ा की फिल्म 'ये है जिन्दगी' का संगीत तैयार कर रहे थे। बाबा ने उन्हें अपना सहयोगी तो बना लिया, मगर कहा कि पैसा-टका कुछ नहीं मिलेगा। फिल्म के सेट पर खय्याम और चोपड़ा सही समय पर पहुँचते। बाकी लोग देरी से आते थे। महीने के आखिरी दिन सबको वेतन दिया गया। केवल खय्याम खाली हाथ रहे। यह देख चोपड़ा ने बाबा से पूछा इन्हें पैसा क्यों नहीं? जवाब मिला- 'ट्रेनिंग पीरियड में यह मुफ्त में काम कर रहा है।' चोपड़ा को यह बात रास नहीं आई। उन्होंने फौरन अकाउंटेंट से 125 रुपए खय्याम को दिलवाए। अपनी हथेली पर इतने रुपए देखकर खय्याम की आँखों में आंसू आ गए। चोपड़ा साहब की इस मेहरबानी को उन्होंने हमेशा याद रखा। खय्याम ने बॉलीवुड के 6 दशक में सिर्फ 57 फिल्मों में संगीत दिया। फिल्में चली या नहीं चलीं, लेकिन उसके गीत सुपर हिट रहे। मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'बाजारे-ए-हुस्न' पर आधारित फिल्म '1918 : ए लव स्टोरी' खय्याम की पसंदीदा फिल्म रही। इस फिल्म में एक दरोगा की बेटी हालात से मजबूर होकर नाच-गाने के धंधे में आ जाती है। इस फिल्म में संगीत देकर एक तरह से उन्होंने मुंशी प्रेमचंद को आदरांजलि दी थी। आज के संगीत पर उनकी राय रहती थी- शोर-ए-बद्तमीजी।





खय्याम : सदाबहार नग़मे

- शामे गम की कसम/तलत/फुटपाथ

- है कली-कली के लब पर/रफी/लाला रुख

- वो सुबह कभी तो आएगी/मुकेश-आशा/फिर सुबह होगी

- जीत ही लेंगे बाजी हम तुम/रफी-लता/शोला और शबनम

- तुम अपना रंजो-गम अपनी परेशानी मुझे दे दो/जगजीत कौर/शगून

- बहारों, मेरा जीवन भी सँवारो/लता/आखरी खत

- कभी-कभी मेरे दिल में खयाल आता है/साहिर/कभी-कभी

- मोहब्बत बड़े काम की चीज है/येसु दास-किशोर-लता/त्रिशूल

- दिल चीज क्या है आप मेरी जान लीजिए/आशा/उमराव जान

- ये क्या जगह है दोस्तो/आशा/उमराव जान


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