क्या 3 तारीख को भी नहीं हो पायेगी निर्भया के दोषियों को फांसी

Medhaj News 18 Feb 20 , 06:01:40 India
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निर्भया केस में पटियाला हाउस कोर्ट ने सोमवार को चारों दोषियों के लिए नया डेथ वॉरंट जारी किया। पिछले 41 दिनों में यह तीसरा डेथ वॉरंट है। इसमें चारों दोषियों को 3 मार्च की सुबह 6 बजे फांसी देने का आदेश है। हालांकि चार दोषियों में से एक के पास अभी दया याचिका और क्यूरेटिव पिटीशन का विकल्प है। ये दोनों विकल्प खारिज होने के बाद भी दोषी नए सिरे से राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेज सकते हैं। दोषियों के खिलाफ एक मामला दिल्ली हाईकोर्ट में भी चल रहा है, जिस पर फैसला आने तक फांसी नहीं हो सकती। यह बात पिछले 7 साल से निर्भया के दोषियों के लिए केस लड़ रहे वकील एपी सिंह ने कही।





एपी सिंह ने बताया, ''मैं क्लाइंट से मिलूंगा। सभी कानूनी विकल्प पर बातचीत करूंगा और फिर वे जो चाहेंगे, जो उनके परिवार वाले चाहेंगे, वो करूंगा। अभी कई कानूनी विकल्प बाकी हैं। सभी का उपयोग किया जाएगा। राष्ट्रपति के पास दोबारा दया याचिका भी भेजी जाएगी और खारिज होने पर भी जो विकल्प होंगे उनका भी उपयोग किया जाएगा। यह पूछने पर कि क्या आगे भी एक-एक कर कानूनी विकल्प उपयोग किए जाएंगे, क्या चारों की याचिकाएं एक साथ नहीं भेजी जा सकती? इस पर उनका जवाब था- दया याचिका के लिए सभी क्लाइंट का आधार अलग-अलग होता है। तो ऐसे में एक-एक कर ही ये याचिकाएं लगाई जाएंगी।

निर्भया के दोषियों पर लूट का केस भी, इस मामले में उन्हें 10 साल की सजा

निर्भया के साथ दुष्कर्म करने से पहल उसके 6 दोषियों- राम सिंह, मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर और नाबालिग ने राम आधार नाम के व्यक्ति से भी लूटपाट की थी। इस मामले में निर्भया के चार दोषियों- मुकेश, पवन, विनय और अक्षय को 2015 में पटियाला हाउस कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी। वकील एपी सिंह बताते हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी गई है और यह मामला अभी पेंडिंग है। और जब तक केस का निपटारा नहीं हो जाता, तब तक चारों को फांसी नहीं हो सकती।

कानूनी रास्ते: क्यों 3 मार्च को भी दोषियों को फांसी मुमकिन नहीं?

1) क्यूरेटिव पिटीशन : तीन दोषी- मुकेश, विनय और अक्षय की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज हो चुकी है। लेकिन पवन के पास अभी भी क्यूरेटिव पिटीशन का विकल्प है।

2) दया याचिका : पवन के पास दया याचिका का विकल्प भी है। इसके अलावा संविधान के तहत दोषियों के पास दोबारा दया याचिका लगाने का भी विकल्प है।

3) दया याचिका को चुनौती : राष्ट्रपति की तरफ से दया याचिका खारिज होने के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

4) प्रिजन मैनुअल : दिल्ली का 2018 का प्रिजन मैनुअल कहता है- जब तक दोषी के पास एक भी कानूनी विकल्प बाकी है, उसे फांसी नहीं हो सकती। अगर उसकी दया याचिका खारिज भी हो जाती है तो भी उसे 14 दिन का समय दिया जाना चाहिए। 


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