उन्नाव सड़क हादसा: CBI ने सेंगर समेत अन्य अभियुक्तों को हत्या के आरोप से बरी किया
उन्नाव सड़क हादसे में रेप पीड़ित लड़की और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे जबकि कार में सवार उसके दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी | सीबीआई के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में अभियुक्तों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर में लगा हत्या का आरोप हटा दिया गया है | प्रवक्ता के मुताबिक, कुलदीप सिंह के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 120 (बी) के तहत आपराधिक षड्यंत्र रचने और ट्रक ड्राइवर आशीष कुमार पाल के खिलाफ धारा 304, 279 और लापरवाही से गाड़ी चलाने जैसे आरोप लगाए गए हैं | सीबीआई के प्रवक्ता ने बताया कि इस मामले में सीबीआई को ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिले जिससे कि इसे 'हत्या की कोशिश' या फिर 'हत्या का षड्यंत्र' साबित किया जाता | इसी साल 28 जुलाई को हुए इस हादसे में सीबीआई ने तत्कालीन बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर और उनके कई साथियों पर कथित तौर पर हत्या की साज़िश रचने, लड़की की हत्या का प्रयास करने और साक्ष्य मिटाने की कोशिश जैसे संगीन आरोपों के तहत मामला दर्ज किया था |

पीड़ित लड़की ने विधायक कुलदीप सेंगर पर रेप का आरोप लगाया था जिसकी जांच सीबीआई पहले से ही कर रही है | 28 जुलाई को रायबरेली में तेज़ रफ़्तार से जा रहे एक ट्रक ने पीड़ित लड़की की कार को टक्कर मार दी थी जिसमें लड़की के अलावा उसके चाचा, चाची और मौसी के अलावा उनके वकील भी सवार थे | हादसे में पीड़ित लड़की की चाची और मौसी की तुरंत मौत हो गई थी जबकि पीड़ित लड़की और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे | पीड़ित लड़की का दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज चल रहा था | इलाज के दौरान ही सीबीआई के सामने उसने अपना बयान भी दर्ज कराया था | पीड़ित लड़की की मां ने मीडिया से बातचीत में सीधे तौर पर इस हादसे को षड्यंत्र बताया था और इसके पीछे विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का हाथ होने का आरोप लगाया था |

साल 2017 में कुलदीप सिंह सेंगर के गांव की ही एक लड़की ने उन पर बलात्कार का आरोप लगाया था | लड़की ने पुलिस पर शिकायत दर्ज न करने का आरोप लगाते हुए लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्महत्या की कोशिश की थी | उसके अगले ही दिन लड़की के पिता की पुलिस हिरासत में संदिग्ध मौत हो गई | पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया कि ऐसा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के इशारे पर हुआ | यह मामला सुर्खियों में आने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप किया जिसके बाद राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई से कराने के निर्देश दिए | इसी मुक़दमे के सिलसिले में गत 28 जुलाई को पीड़ित लड़की अपने वकील व परिवार के अन्य सदस्यों के साथ रायबरेली जा रही थी, उसी समय यह दुर्घटना हुई | पीड़ित लड़की और उसके वकील का पहले लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में इलाज हुआ, उसके बाद दोनों को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान लाया गया | पिछले महीने दोनों को एम्स से छुट्टी मिली लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित लड़की की दिल्ली में ही रहने की व्यवस्था करने का सरकार को निर्देश दिया है | इस हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित लड़की और उसके परिजनों को सीआरपीएफ़ की सुरक्षा देने के निर्देश दिए थे |

