पंजाब विधानसभा ने करतारपुर साहेब की जमीन का अदला बदला का प्रस्ताव पारित किया
ये कोई अनोखी बात नही है कि भारत करतारपुर साहेब की जमीन को ले ले और बदले में दूसरी जमीन देदे ये अदला बदली हो सकती है यदि पाकिस्तान तैयार हो, पाकिस्तान तभी तैयार होगा जब उसका स्वार्थ सिद्ध होगा , वो ऐसा रास्ता देखेगा की भारत में वो आतंक भड़ा सके। 2015 में भारत और बांग्लादेश के साथ हो चुका है , जिससे 53000 बांग्लादेशी और भारतीयों को फायदा हुआ था, 1963 में भी पाकिस्तान चीन ने किया था , पाकिस्तान ने उत्तरी कश्मीर की 750 वर्ग मील ज़मीन चीन को दे दी थी बदले में पाकिस्तान को लद्दाख का हिस्सा मिला, ये बात अलग है कि भारत ने इसको मान्य नही कहा |
पंजाब ने पाकिस्तान से श्री करतारपुर गुरु्द्वारे की जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव किया है। इस सबंध में पंजाब विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। प्रस्ताव के अनुसार पाकिस्तान श्री करतारपुर गुरुद्वारे की जमीन भारत को दे दे और इसके बदल में उसे इतनी ही जमीन अन्य स्थान पर दे दी जाए। यह प्रस्ताव अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
विधानसभा में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कॉरिडोर को लेकर भारत सरकार व पाकिस्तान सरकार का धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। इसमें श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व से पहले कॉरिडोर को शुरू करने के जरूरी काम पूरे करने की बात कही गई। इसमें संशोधन करवाते हुए शिअद विधायक व पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव भी इसमें शामिल करना चाहिए।
इसके बाद मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इसे प्रस्ताव में शामिल कर लिया। प्रस्ताव बिना किसी विरोध के पास हो गया। प्रस्ताव के दौरान कैप्टन ने नवजोत सिंह सिद्धू का नाम नहीं लिया, जबकि आप ने कॉरिडोर का श्रेय सिद्धू को दिया। कैप्टन ने कहा कि कॉरिडोर भारत-पाकिस्तान बीच 'अमन का सेतु' बनेगा। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कॉरिडोर मामले पर कहा, 'सिद्धू जी हम साथ चलेंगे। यह अच्छी शुरुआत है। इसे नकारात्मक रूप से नहीं देखना चाहिए। कॉरिडोर खुलता है तो वहां पर भी फुलप्रूफ इंतजाम होंगे।' वहीं, सिद्धू से कहा कि श्री गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व मानने के लिए अकाली दल की जहां भी जरूरत हो वह साथ चलेंगे।
फिरोजपुर के हुसैनीवाला स्थित शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव का समाधि स्थल पहले पाकिस्तान के कब्जे में था। 1950 में इसे वापस लेने पर सहमति वापस बनी। करीब दस साल बाद 17 जनवरी 1961 को फाजिल्का के 12 गांव व सुलेमान की हेड वर्क्स पाकिस्तान को देने के बाद यह स्थल भारत को मिला।1968 में इसे राष्ट्रीय समाधि स्मारक बनाया गया। गौरतलब है कि भगत सिंह राजगुरु व सुखदेव का अंतिम संस्कार सतलुज किनारे इसी भूमि पर हुआ था। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ने कुछ दिन पहले हुसैनीवाला की तर्ज पर करतारपुर की जमीन बदलने का मुद्दा उठाया था।
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