प्रशांत किशोर ने बताई नितीश कुमार से दुरी की वजह

Medhaj News 18 Feb 20 , 06:01:40 India
nitish_prashant_.jpg

चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि नीतीश कुमार ने उन्हें बेटे की तरह रखा। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया, लेकिन मैं फिर भी उनका सम्मान करता हूं। उन्होंने उनके साथ मतभेद की वजह भी बताई। प्रशांत किशोर ने कहा, 'मुझे पार्टी में शामिल करने और पार्टी से निकालने के फैसले को दिल से स्वीकार करता हूं। उन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं और आगे भी नहीं करना चाहता। ये उनका एकाधिकार था। वो पार्टी में रखना चाहते थे और नहीं रखना चाहते थे ये भी उनका अधिकार है। उनके लिए हमेशा मेरे दिल में आदर रहेगा. हम लोगों में दो वजहों से मतभेद थे। लोकसभा चुनाव से ही हमारी इन वजहों को लेकर बातचीत चल रही थी।





उन्होंने बताया कि पहली वजह विचारधारा को लेकर है, नीतीश जी का कहना है वह गांधी, जेपी और लोहिया को और उनकी बातों को नहीं छोड़ सकते। लेकिन मेरे मन में यह दुविधा रही कि कोई अगर ऐसा सोचता है तो वह उस समय गोडसे के साथ खड़े होने वाले और उनकी विचारधारा के लोगों के साथ कैसे खड़े हो सकते हैं। भाजपा के साथ उनके रहने पर कोई गुरैज नहीं, लेकिन दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकती। उनकी अपनी सोच है और मेरी अपनी सोच है। गांधी और गोडसे साथ नहीं चल सकते। पार्टी के नेता के तौर पर आपको यह बताना होगा कि हम लोग किस तरफ हैं।

साथ ही उन्होंने कहा, 'दूसरा जदयू और नीतीश कुमार की गठबंधन में पोजिशन को लेकर है। नीतीश कुमार पहले भी भाजपा के साथ थे और अब भी हैं। लेकिन दोनों में बहुत फर्क है। नीतीश कुमार पहले बिहार की शान थे, बिहार के लोगों के नेता थे। आज वो 16 सांसद लेकर गुजरात का कोई नेता बताता है कि आप ही नेता बने रहिए। बिहार का मुख्यमंत्री यहां के लोगों का नेता है, आन-शान है, कोई मैनेजर नहीं है। कोई दूसरी पार्टी का नेता नहीं बताएगा कि वह हमारे नेता हैं। हम लोग सशक्त नेता चाहते हैं, जो पूरे भारत और बिहार के लिए अपनी बात कहने के लिए किसी का पिछलग्गू ना बने।



पीके के खाते में दर्ज हैं ये बड़ी जीत

2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को जीत का फॉर्मूला गढ़ा। 2015 में बिहार में महागठबंधन की जीत का श्रेय भी पीके को मिला। ऐसे ही आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस और पंजाब में कांग्रेस की जीत में पीके की प्रचार टीम का अहम रोल था। इसके अलावा दिल्ली में आम आदमी पार्टी और महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ का काम किया। फिलहाल पीके की कंपनी पश्चिम बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके के साथ काम कर रही है।


    Comments

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends