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2002 गुजरात दंगे: नानावती आयोग ने पीएम मोदी को क्लीन चिट दी

Medhaj News 11 Dec 19 , 06:01:39 India
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2002 गुजरात दंगों की जांच के लिए गठित नानावती आयोग ने अपनी फाइनल रिपोर्ट गुजरात विधानसभा में आज पेश कर दी है | इसमें पीएम मोदी को क्‍लीन चिट दी गई है | नानावटी रिपोर्ट में कहा गया कि दंगे 'सुनियोजित' नहीं थे | तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य सभी राजनेताओं को क्लीन चिट दी गई |  हालांकि रिपोर्ट में तीन आईपीएस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं | तत्‍कालीन तीन आईपीएस अफसर आरबी श्रीकुमार, संजीव भट्ट और राहुल शर्मा की भूमिका संदेहात्मक होने का रिपोर्ट में खुलासा किया गया है | गृह मंत्री प्रदीप सिंह ने कहा - नरेंद्र मोदी पर आरोप लगा था कि किसी भी जानकारी के बिना वो गोधरा गए थे | इस आरोप को आयोग ने ख़ारिज कर दिया है | इसके बारे में सभी सरकारी एजेंसियों को जानकारी थी | आरोप था कि गोधरा रेलवे स्टेशन पर ही सभी 59 कारसेवकों का शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया था | इस पर आयोग का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश से नहीं बल्कि अधिकारियों के आदेश से पोस्टमार्टम किया गया था | रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी किसी भी जानकारी के बिना गोधरा गए थे | इस आरोप को पंच ने खारिज कर दिया है |

इसके बारे में सभी सरकारी एजेंसियों को जानकारी थी | गोधरा स्टेशन पर सभी 59 कारसेवक के शवों का पोस्टमॉर्टम किया गया था | आयोग का कहना है कि वहां पर मौजूद अधिकारियों के आदेश पर पोस्टमॉर्टम किया गया था न की मुख्यमंत्री के आदेश पर | संजीव भट्ट ने जो आरोप लगाया था कि हिन्दुओं को अपना गुस्सा निकालने दिया जाए, आयोग का कहना है कि इस मीटिंग में ऐसे कोई आदेश मुख्यमंत्री के जरिये नहीं दिए गए थे |  सरकार ने किसी भी तरह के बंद का ऐलान नहीं किया था | तीन दिन तक चली हिंसा में सैकड़ों लोग मारे गए थे जबकि कई लापता हो गए | आरोप लगते हैं कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी दंगाइयों को रोकने के लिए जरूरी कार्रवाई नहीं की | उन्होंने पुलिस दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई न करने के आदेश दिए | बाद में केंद्र की यूपीए सरकार ने दंगों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था जिसने अपनी रिपोर्ट में नरेंद्र मोदी को क्लीनचिट दे दी थी | वहीं इससे पहले गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 11 दोषियों की सजा फांसी से उम्रकैद में बदल दी थी | एसआईटी कोर्ट ने 1 मार्च, 2011 को गोधरा ट्रेन अग्निकांड मामले में 31 लोगों को दोषी पाया था और 63 को बरी कर दिया था | अदालत ने दोषी पाए गए लोगों में से 11 लोगों को फांसी और 20 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी |


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