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नागरिकता संशोधन बिल, इतना हंगामा क्यो बरपा है भाई

Medhaj News 13 Dec 19 , 06:01:39 India
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ऐन डी ए सरकार ने 370, तीन तलाक, अब नागरिक संसोधन बिल पास किया है इस बिल पर हिन्दू/मुस्लिम  इतना हंगामा क्यो कर रहे है, जबकि ये बिल शरणार्थी और घुसपैठियों के लिये है। इसका किसी भी धर्म से न होकर ये बिल उन लोगों के लिए है जो भारत मे शरण लिए और जो भारत मे गलत तरीके से घुसे है । ये बिल हिंदू के साथ ,सिख, सिंधी, और जो 1971 से पहले आये मुस्लिम आदि भी है। हिन्दू पर भारत में भी अत्याचार हुआ है । मुस्लिम भारत मे शुरू से श्रेष्ठ रहे है। मगर किस भी मुस्लिम ने अपने ही भाई हिन्दू के लिए कभी आवाज नही उठाई न ही सरकारों ने। हिन्दू पर हुये अत्याचार पर मरहम किसी ने नही लगाया चाहे युगांडा में 1972हुए अत्याचार हो। युगांडा के तानाशाह अमीन ने  में वर्षों से रह रहे 60000 एशियाइयों (गैर मुस्लिम, मुख्यतः हिन्दू ) को अचानक देश छोड़ देने का आदेश दे दिया। उन्हें देश छोड़ने के लिए 3 महीने का समय दिया गया। ईदी अमीन को अचानक एक सपना आया और उन्होंने युगांडा के एक नगर टोरोरो में सैनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि अल्लाह ने उनसे कहा है कि वो सारे एशियाइयों (गैर मुस्लिम मुख्यतः हिन्दू) को अपने देश से तुरंत निकाल बाहर करें। जबकि वो सपना नही था।कारनामा कर्नल गद्दाफ़ी का था। हर व्यक्ति को अपने साथ सिर्फ़ 55 पाउंड और 250 किलो सामान ले जाने की इजाज़त थी।





लोगों के सूटकेस खोल कर देखे गये थे ताकि वो देख सकें कि उसमें सोना या पैसा तो छिपा कर तो नही ले जा रहे है, एक  लड़की गीता की उंगली से अंगूठी नहीं निकली तो सैनिकों ने उसकी अंगुली काट दी। ये एक अत्याचार नही है तो क्या था लोगों को अपनी दुकानें और घर ऐसे ही खुले छोड़ कर आना पड़ा। उन्हें अपना घर का सामान बेचने की इजाज़त नहीं थी। वँहा के सैनिक उनका वो सामान भी लूट रहे थे और फ़िराक में थे, चेकिंग की 5 स्तर की लेयर थी हर रोड  पर उनकी तलाशी होती थी। जॉर्ज इवान स्मिथ अपनी किताब  घोस्ट ऑफ़ कंपाला में लिखते हैं, अमीन ने एशियाइयों की ज़्यादातर दुकानें और होटल अपने सैनिकों को दे दिए।  निकाले गए 60000 लोगों में से 29000 लोगों को ब्रिटेन ने शरण दी। करीब 11000 लोग भारत आ सके जबकि इनमे से अधिकांश भारतीय गैर मुस्लिम थे। करीब 5000 लोग कनाडा गए । कितने  मारे गए उसका कोई रिकार्ड नहीं।उस समय की तत्कालीन सरकार ने उन हिन्दुओ को भारत लाने की कोशिश नही की।1948 मे पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर से हजारों लोग जान बचा कर भारतीय कश्मीर मे आए। उसमे से 99% से अधिक हिन्दू थे। इनमे भी अधिकांश दलित थे। आज उनकी संख्या 8 लाख है। धारा 370 समाप्त करने के बाद इन्हें नागरिकता मिली है।1971 बांग्लादेश बना, बड़ी संख्या मे बंग्लादेशी हिन्दू जान बचा कर आए। सबसे अधिक लूट, ह्त्या और बलात्कार के पीड़ित ये जिसमे हिन्दू ज्यादा थे। सरकार की मानसिकता देखिए। 93000 कैदी सैनिकों के लिए तो विशेष में भोजन और सुविधाएं, परंतु उन शरणार्थी हिंदूओ के लिए कुछ भी नहीं ! वँहा से आये मुस्लिम को शरण दी मगर पाकिस्तान से आये को नही ऐसा क्यो। यही हाल 1990 खाड़ी युद्ध हुआ था।कुवैत से बड़ी संख्या मे (1.5 लाख लगभग) परंतु अपने ही देश कश्मीर से 3 लाख से अधिक कश्मीरी पंडित भागा दिए गए। अफगानिस्तान में अब के।हज़ार सिख बचे है , बांग्लादेश और पाकिस्तान में गैर मुस्लिम स्तर का कहना ही क्या। कोई तो एक देश ऐसा हो जंहा इनको भी जीने का अधिकार मिले


    Comments

    • Medhaj News
      Updated - 2019-12-13 18:29:09
      Commented by :Aaaa

      Those who are supporting NRC and CAB, just read the following and give your opinion... For generations Ram's and Rahim's family were staying in India, and suddenly government ask them to submit pre-1971 documents to prove there citizenship as per NRC (Pls note Election card, Passport or similar documents issued post 1971 is not considered as proof). Ram cant submit the Pre-1971 docs as they lost those documents in a flood which happened decades back.. Rahim submitted the docs but there were some errors and spelling mistakes which were very common in certificates and documents of that era... And when the citizenship list published both Ram's and Rahim's families were not listed in it...... but as per Citizenship amendment bill (CAB), Ram's family can get their citizenship back by just submitting any proof showing they were living in the country for last 6 years as their religion is Hinduism and rahim's can't as their religion is Islam.. so do you guys think its fair???


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