चंदे पर सवालः 20 हजार से ज्यादा चंदा पाने में #Bjp अव्वल! पार्टियों के चंदे में आई गिरावट
नोटबंदी के बाद से लोगों ने राजनीति दलों के चंदे को लेकर सवाल कर रहे थे। लोग पूछ रहे थे कि आखिर राजनीतिक दलों को इनकम टैक्स से छूट क्यों मिलती है। क्यों वे 20 हजार से कम के चंदे का हिसाब नहीं देते। क्यों वे पुराने नोटों को बतौर चंदा स्वीकार कर रहे हैं? इन सभी सवालों के बीच कुछ जवाब सामने आया है। जवाब भी ऐसा कि जिसे आपको जरूर पढ़ना चाहिए।
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बता दें, देश के 7 राष्ट्रीय दलों को 2015-16 के दौरान 20 हजार से अधिक चंदे के तौर पर 102 करोड़ रूपए मिला है। ये सारी रकम 1744 चंदे से मिले हैं। इसमें भी बीजेपी ने बाजी मारी है। कुल 613 दानदाताओं ने अकेले बीजेपी को 76 करोड़ रूपए बतौर चंदा दिए हैं।
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के मुताबिक, बीजेपी को बतौर चंदा सबसे ज्यादा राशि मिली है। बीजेपी को कांग्रेस, एनसीपी, सीपीआई, सीएपीएम और टीएमसी से तीन गुना ज्यादा चंदा मिला है। कांग्रेस को बीजेपी के बाद सबसे ज्यादा चंदा मिला है। कांग्रेस को कुल 20 करोड़ रूपए बतौर चंदा मिला है। चंदे का पूरा ब्यौरा पार्टियों ने चुनाव आयोग को सौंपा है।
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हालांकि, कांग्रेस औऱ बीजेपी ने चुनाव आयोग को आयकर रिटर्न की जानकारी नहीं दी है। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि 20,000 से कम के चंदे की पूरी जानकारी नहीं दी गई है। वहीं बीएसपी ने घोषणा है कि 2015-16 के दौरान उसे 20000 से कम का चंदा नहीं मिला है। लेकिन सबसे बड़ी हैरान करने वाली बात यह है कि 2014-15 के मुकाबले 2015-16 मे राजनीतिक दलों को कम चंदे मिले हैं। 2014-15 में राजनीतिक दलों को कुल 630 करोड़ रूपए मिले थे। यानि की करीब 528 करोड़ रूपए की कमी आ गई। इसका मतलब यह हुआ कि राजनीतिक दलों के चंदे में 84 फीसदी का भारी गिरावट आई है।
एनसीपी का हाल इस बार कुछ ज्यादा ही बुरा रहा। एनसीपी के चंदे 98 फीसदी गिरावट आई है। इस बार उसे सिर्फ 71 लाख रूपए ही बतौर चंदा मिला।
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