Headline



रंगा बिल्ला के बाद अब चारो को होगी एक साथ फांसी

Medhaj News 13 Dec 19 , 06:01:39 India
fasi.png

1982 में 1978 के जघन्य अपराध के लिए रंगा उर्फ कुलजीत सिंह और बिल्ला उर्फ जसवीर सिंह को एक साथ फाँसी पर लटकाया गया था , तब भी केस रेप और खून का था अब भी है। नाम है निर्भय केस। चारो को एक साथ लटकाना का ये आज़ाद भारत मे पहला होगा। ये खबर अब उन अपराधियो को लग गई है इसलिये जो कल तक मौज में थे अब दहशत में है। खाना खाना छोड़ दिया है या कम हो गया है, नींद गायब है और रात में।अपने सेल में टहलते रहते है, खौफ का मंज़र अब साफ नजर आता है, बोलना कम कर दिया है, वजन कम हो गया है। उनको दुसरीं सेल में शिफ्ट कर दिया है, जंहा संसद के हमले के अपराधी को रखा था, जिससे उनका खौफ और बढ़ गया है...... Arya





दिल्ली की अब तक की सबसे हैवानियत भरी घटनाओं में यह ऐसी पहली घटना थी, जब पूरी दिल्ली ने आरोपियों को फांसी पर लटकाने के लिए लड़ाई लड़ी थी। रंगा-बिल्ला मामले के बाद निर्भया मामले में देशभर में बड़ा आंदोलन उठा। जल्द ही निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटका दिया जाए।





मामला चार दशक पहले 1978 का है। आर्मी अफसर के बच्चे गीता और संजय ऑल इंडिया रेडियो में एक कार्यक्रम के सिलसिले में जा रहे थे। गोल डाकखाने के पास 26 अगस्त, 1978 को लिफ्ट देने के बहाने रंगा और बिल्ला ने उन्हें कार में बिठा लिया। बाद में दोनों बच्चे जब वापस नहीं आए तो शिकायत दर्ज हुई। तीन दिन बाद 29 अगस्त को दोनों बच्चों की डेडबॉडी मिली। उसमें पता चला कि गीता की हत्या से पहले रेप किया गया था। पता चला कि रंगा-बिल्ला नाम के दो लोगों ने यह हैवानियत की थी। पुलिस ने दोनों को 8 सितंबर, 1978 को ट्रेन से गिरफ्तार कर लिया था। बाद में दोनों को 31 जनवरी 1982 को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटका दिया गया था। इस मामले में सबसे पहले शिकायत मंदिर मार्ग थाने में आई थी। उसके बाद जब डेडबॉडी राजेन्द्र नगर थाने के इलाके में बरामद हुई तो केस को उसी थाने में ट्रांसफर कर दिया। लंबी लड़ाई के बाद जब 31 जनवरी, 1982 को रंगा-बिल्ला को फांसी पर लटका दिया गया,



 


    Comments

    Leave a comment



    Similar Post You May Like

    Trends